DBGB दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक (स्वतंत्र भारत के माथे पर एक बदनुमा दाग)

 दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक एक ऐसा सरकारी संस्थान है जहाँ संसद से पारित श्रम कानून अपना दम तोड़ देते हैं और जहाँ भारत सरकार के श्रम अधिकारी शक्तिहीन दिखाई पड़ते हैं | आपको यह जानकार आश्चर्य होगा, लेकिन यह सच है |  दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक वर्षों से खुलेआम श्रम कानूनों का उल्लंघन करता चला आ रहा है और श्रम विभाग के  सरकारी अधिकारी श्रम कानूनों का पालन करने के लिए बैंक को निर्देश देने की भी हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं |  विभिन्न शिकायती पत्रों के माध्यम से बैंक की शाखाओं के निरीक्षण की मांग को एक वर्ष से भी अधिक समय व्यतीत हो चुका है लेकिन श्रम विभाग के उच्चाधिकारी बैंक की शाखाओं का निरीक्षण करने का आदेश अभी तक जारी नहीं कर सके हैं | 

दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक में काम करने वाले दैनिक मजदूरों / सफाई कर्मियों को मजदूरी के भुगतान में श्रम कानूनों के प्रावधानों का खुलेआम उल्लंघन किया जाता है |  बैंक के खिलाफ अनेक शिकायतें पटना से लेकर दिल्ली तक की गयी हैं लेकिन इस शिकायतों को श्रम विभाग के अधिकारियों ने फ़ुटबाल बना दिया है | माननीय श्रम मंत्री कार्यालय से मुख्य श्रमायुक्त कार्यालय, फिर वहां से उप श्रमायुक्त  कार्यालय पटना, उसके बाद वहां से श्रम प्रवर्तन अधिकारियों को शिकायतें भेजी गयी हैं | बैंक के विरुद्ध पहली सामूहिक शिकायत  नवम्बर 2023 को भेजी गयी थी | उसके बाद 23.02.2024 और 07.03.2024 को दो और शिकायतें भेजी गयीं | उच्च अधिकारियों ने इन शिकायतों को श्रम प्रवर्तन अधिकारियों के पास भेज दिया गया लेकिन श्रम प्रवर्तन अधिकारियों को बैंक की शाखाओं का निरीक्षण करने की अनुमति नहीं दी, जिसके कारण शिकायतों पर सही प्रकार से जाँच नहीं हो सकी | श्रम प्रवर्तन अधिकारी, गया ने अपनी मेल दिनांक 18.11.2024 और पत्र दिनांक 28.03.2025 के माध्यम से यह अवगत कराया  है कि CAIU अप्रूवल के बिना वे बैंक की शाखाओं का निरीक्षण नहीं कर सकते हैं | 




दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक में खुलेआम श्रम कानूनों का उल्लंघन और श्रम विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी स्वतंत्र भारत के माथे पर एक कलंक/ एक बदनुमा दाग से कम नहीं है |

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